जैव विविधता- पृथ्वी के विभिन्न आवासों पर विभिन्न प्रकार के पादप एवं जंतु जातियां पाई जाती हैं इन विभिन्न प्रकार के जीवो के उपस्थिति को जैव विविधता कहते हैं। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1985 में वाल्टर जी रोजन ने किया।
जैव विविधता के प्रकार- जय विविधता के निम्न प्रकार होते हैं-
• आनुवंशिक विविधता-आनुवंशिक विविधता का तात्पर्य एक ही जाति में पाई जाने वाली विभिन्न नेता से है यह विभिन्न बताएं जिनमें पाई जाने वाली विविधताओं के कारण उत्पन्न होती हैं। जैसे-
चावल की अनेकों किस में पाई जाती हैं जो कि एक दूसरे से भिन्न होती हैं।
• जातीय विविधता-जाति का तात्पर्य जीवों के समूह से हैजो आपस में जनन कर सकती हैं। जाति प्रचुरता जितनी अधिक होगी, जाति विविधता उतनी ज्यादा होगी।
• पारितंत्रीय विविधता-यह विविधता किसी देश में पारिस्थितिकी स्तर पर पाई जाने वाली विभिन्नता को दर्शाती है। जैसे - रेगिस्तान, वर्षा वन ,पतझड़ वन इत्यादि।
जैव विविधता के प्रतिरूप- पृथ्वी पर जैव विविधता का वितरण असमान है यह समान रूप से वितरित नही है कहीं पर यह बहुत अधिक कहीं पर बहुत कम देखने को मिलती हैं।
• अक्षांशीय प्रवणता- सामान्यतया जैसे-जैसे भूमध्य रेखा से धुव्रों तथा शीतोष्ण क्षेत्र की ओर जाते हैं तो जैव विविधता कम होती जाती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में उच्च जैव विविधता के निम्न कारण होते हैं-
• स्थाई व गर्म तापक्रम एवं अधिक नमी युक्त वातावरण।
• उष्णकटिबंधीय समुदाय, शीतोष्ण समुदायकी तुलना में अधिक पुराना है इसी कारण इस क्षेत्र की प्रजातियों में अधिक विशिष्टताएं एवं अनुकूलन पाए जाते हैं।
• उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शीतोष्ण क्षेत्र की तुलना में अधिक स्थाई वातावरण पाया जाता है अतः स्थानी जातियां अधिक जीवित रहती हैं।
• जातीय क्षेत्र संबंध-किसी भी विशिष्ट क्षेत्र में जातीय समृद्धि अन्वेषण क्षेत्र बढ़ाने पर कुछ सीमा तक बढ़ती है। वास्तव में जातीय समृद्धि चमगादड़, मछलियां आदि के मध्य संबंध एक आयताकार अतिपरवलय के रूप में परिलक्षित होता है।
यह लघुगणक पैमाने पर सीधी रेखा में दिखाई देता है इसका संबंध निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित होता है-
Log5=Log C+Z Log A
Where
S=जातीय समृद्धि
A=क्षेत्र,C=अंतः खंड
Z=रेखीय ढाल
जैव विविधता का महत्व-मानव जीवन के लिए वन्य जीव धारियों का आर्थिक महत्व निम्न वत है-
वन संरक्षण का महत्व-
• वन पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहायक होते हैं इनसे हमें प्राणवायु प्राप्त होती है।
• वनों से हमें ईंधन इमारती लकड़ी ,बांस बेंत कागज फल फूल एवं कंद इत्यादि प्राप्त होते हैं।
• पारितंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं।
• मानव को अपने भौतिक अवस्थाओं के लिए वनों पर निर्भर होना पड़ता है।
• वन्य जीव संरक्षण का महत्व-
• पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए उत्पादक तथा उपभोक्ता के मध्य संतुलन बना रहना आवश्यक है अन्यथा पारितंत्र को हानि होती है।
• वन्यजीवों पर मानव अनेक अनुसंधान या प्रयोग करता है।
• वन्यजीवों को जीन बैंक के रूप में सुरक्षित रखा जाता है जिससे भविष्य में इनका उपयोग किया जा सके और प्रजाति सृष्टि में बनी रहे।
• कुछ वन्य प्राणियों का औषधीय महत्व होता है जैसे कस्तूरी मृग, गैंडे के सींग, हाथी के दांत इत्यादि।
जीन बैंक-दुर्लभ संकटग्रस्त व वंचित गुरु युक्त पादपों एवं प्राणियों के जीवन को जिस स्थान पर संरक्षित किया जाता है उसे जीन बैंक कहते हैं।
जैव विविधता का संरक्षण-जय विविधता का संरक्षण निम्न दो प्रकार से किया जाता है-
• In situ Conservation स्वस्थाने संरक्षण-इसके अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों को उनके प्राकृतिक अथवा कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र में संरक्षित किया जाता है। इसके लिए प्राकृतिक वास स्थानों जैसे चरागाह मैदान झील तालाब नदी इत्यादि का संरक्षण आवश्यक है इन स्थानों को निषेध क्षेत्र घोषित किया जाता है जैसे- राष्ट्रीय उद्यान, प्राणिबिहार, सेंचुरी, जैवमंडल ,पवित्र उपवन इत्यादि।
• बाह्य स्थाने संरक्षण Ex Situ Conservation -इसके अंतर्गत संकटग्रस्त जीव तथा उनके जीन पूल को प्राकृतिक आवासों से हटाकर किसी विशेष स्थान पर संरक्षित किया जाता है बाय स्थानीय उत्थाने संरक्षण कहलाता है। इसके लिए पुनर्वास केंद्रों की स्थापना की गई है इसमें चिड़ियाघर, वनस्पतिक उद्यान, पराग बैंक, जीन बैंक तथा ऊतक संवर्धन इत्यादि आते हैं
• सन 1972 ईस्वी में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित हुआ था।
Hotspot -वह भौगोलिक स्थान या क्षेत्र जहां जैव विविधता की अधिकता हो तथा इन जीवों के प्राकृतिक आवास पर खतरा हो तथा इनके संरक्षण की अति आवश्यकता हो, जैव संवेदी क्षेत्र या हॉटस्पॉट कहलाता है।
जैव विविधता के हॉटस्पॉट की संकल्पना नार्मेन मेयर (1988) ने प्रस्तुत की थी। वर्तमान में विश्व में कुल 25 हॉटस्पॉट हैं जिसमें से 4 भारत में है जो कि निम्न है-
• प्रथम हॉटस्पॉट- हिमालय क्षेत्र
• द्वितीय हॉटस्पॉट- एंडो वर्मा
• तृतीय हॉटस्पॉट-पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका
• चतुर्थ हॉटस्पॉट-सुंडालैंड
• समस्त हॉटस्पॉट मिलकर संसार का केवल 27% भाग बनाते हैं जबकि भारत में यह 16.86% भाग बनाते हैं।
• संकटग्रस्त जातियां-ऐसी जातियां जोकि विलुप्त होने की कगार पर हो तथा उन्हें बचाना कठिन हो, संकटग्रस्त जातियां कहलाते हैं कुछ संकटग्रस्त जातियां निम्न है-
• पादप जातियां- सर्पगंधा, अश्वगंधा, चंदन, घटपर्णी, ड्रोसेरा इत्यादि।
• जंतु जातियां-भारतीय शेर, गैंडा, बाघ, कस्तूरी मृग, हाथी, अजगर, तीतर, बटेर, गिद्ध,बाज इत्यादि।
• विलुप्त जातियां-किसी जीव जाति का पृथ्वी से पूर्ण रूप से समाप्त हो जाना विलुप्त कहलाता है। एक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार सन 1900 से प्रतिवर्ष एक स्तनी जाति विलुप्त हो जाती है। भारत की हिमालयी गुलाबी सिर वाली बत्तख विलुप्त जाति है।विलुप्त प्राकृतिक अथवा आप्राकृतिक हो सकती है।
• प्राकृतिक विलुप्ति -वातावरणीय दशाओं के बदल जाने पर पुरानी जीव जातियां समाप्त या विलुप्त हो जाती हैं तथा नई नई या अधिक विकसित प्रजातियां उनका स्थान ले लेती हैं।
• अप्राकृतिक विलुप्त- प्राकृतिक एवं जीव जातियों का मनुष्य सबसे बड़ा शत्रु है दुर्भाग्यवश मनुष्य अपनी क्षमताओं का उपयोग प्रकृति के संरक्षण में ना करके इस के विनाश में कर रहा है।
• Red Data Book -विश्व संरक्षण संघ या जिसे IUCN कहा जाता है के द्वारा एक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है जिसे रेड डाटा बुक कहते हैं। इसके अंतर्गत विलुप्त हो रहे जीवों की प्रजातियों का संग्रह किया जाता है। इसमें लगभग 18000प्रजातियों के नाम संकलित हैं, जिसमे 11296 संकटग्रस्त जन्तु तथा 5685पादप जातियां हैं। रेड डाटा बुक तैयार करने का उद्देश्य संकटग्रस्त जीव धारियों को संरक्षण प्रदान करना तथा इनके उत्पादों के व्यापार पर रोक लगाना है। जैसे भारतीय शेर, बाघ, गैंडा इत्यादि।
• जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र- जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र की परिकल्पना सन 1975 में दी गई थी।यह परिकल्पना यूनेस्को के मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के अंतर्गत दी गई थी। इसके अंतर्गत जीवमंडल अभयारण्यों की स्थापना की योजना बनाई गई। ऐसे अभयारण्यों में केवल जंतु या पादपों की जातियों का संरक्षण नहीं होता है बल्कि इनमें निवास करने वाले मनुष्यों को भी संरक्षण प्रदान किया जाता है इसे जैवमंडल अभयारण्य या आरक्षित क्षेत्र कहते हैं भारत में जीवमंडल अभयारण्य कार्यक्रम 1986 में प्रारंभ किया गया तथा अब तक भारत सरकार द्वारा 18 अभयारण्य स्थापित किए गए हैं जिनमें से कुछ निम्नवत हैं-
National Park राष्ट्रीय उद्यान-वह क्षेत्र जो वन्यजीवों के लिए पूर्ण रूप से संरक्षित हो तथा जहां मानव गतिविधियों पर निषेध हो राष्ट्रीय पार्क कहलाता है वर्तमान में हमारे देश में 104 राष्ट्रीय उद्यान है जो भारत के 39919 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं जिनमें से कुछ निम्न है
प्राणि विहार-इनकी स्थापना तथा नियंत्रण प्रादेशिक शासन करता है इनका उद्देश्य केवल वन्यजीवों का संरक्षण करना होता है।हमारे देश में विभिन्न जिलों व राज्यों में कुल 448 प्राणि विहार है। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 100000 वर्ग किलोमीटर तक है इनमें से कुछ निम्नलिखित-जलदापारा जन्तु विहार, मदारीहाट-पश्चिमी बंगाल 2. घाना पक्षी विहार, भरतपुर-राजस्थान।
